Pages

Friday, 9 August 2013

बुंदेलखण्ड को बनाएंगे विकास का ‘माडल’: बेनी

केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस की अगली सरकार बनते ही अति पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखण्ड को विकास का ‘माडल’ बनाकर देश के सामने रख दिया जाएगा वर्मा ने झांसी में इस्पात प्रसंस्करण इकाई के उद्घाटन समारोह में कहा कि केन्द्र में कांग्रेस की अगली सरकार बनी तो बुंदेलखण्ड का विकास किया जाएगा और उसे तरक्की का माडल बनाकर देश के सामने रखा जाएगा.

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बुंदेलखण्ड को अलग राज्य बनाये जाने की मांग का वह अपने नेतृत्व के सम्मुख समर्थन भी करेंगे.

वर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र में जनता की मांग पर स्टील यार्ड तथा सर्विस सेंटर भी खोला जाएगा, जहां क्षेत्रीय लोगों को नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर नौकरियां दी जाएंगी.

उन्होंने राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार पर प्रदेश को लूटने का आरोप लगाया और कहा कि समूचा राज्य अपराधियों की गिरफ्त में है.

केन्द्रीय राज्यमंत्री तथा क्षेत्रीय सांसद प्रदीप जैन आदित्य ने इस मौके पर वर्मा से कहा कि वह द्वितीय राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की चर्चा कांग्रेस नेतृत्व से करने में सहयोग दें.
 

Sunday, 21 July 2013

बुंदेलखंड पैकेज का 15 तक होगा सत्यापन

मंडल के चारों जिलों में बुंदेलखंड पैकेज के कार्यों के सत्यापन के लिए मंडलायुक्त ने चार टीमें गठित कर अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है। सत्यापन रिपोर्ट 15 अगस्त तक प्रस्तुत करने को कहा गया है।
बुंदेलखंड पैकेज से वर्ष 2011-12 व 2012-13 में चारों जिलों में कराए गए कार्यों का शत-प्रतिशत सत्यापन होगा। मंडलायुक्त अशोक दीक्षित द्वारा नामित अधिकारियों में संयुक्त विकास आयुक्त, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (बांदा) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (बांदा) को ग्राम विकास, पशुपालन विभाग व दुग्ध विकास विभाग के कार्यो का सत्यापन करने को कहा गया है। दूसरी टीम मेें एआईजी स्टांप (बांदा), अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (महोबा) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (महोबा) को सिंचाई विभाग व लघु सिंचाई विभाग के कार्यों के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तीसरी टीम में अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (चित्रकूट) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (चित्रकूट) को कृषि विभाग, कृषि विपणन (मंडी परिषद) और उद्यान विभाग की जांच सौंपी गई। चौथी टीम में अपर आयुक्त (द्वितीय), अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (हमीरपुर) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (हमीरपुर) को वन विभाग, भूमि विकास एवं जल संसाधन और ग्रामीण पेयजल संबंधी कार्यों की जांच करेंगे।

Monday, 1 July 2013

बुन्देलखण्ड राज्य बन कर रहेगा: bundelkhand state demand The dormant agitation for a separate Bundelkhand State


बुन्देलखण्ड को राज्य के रूप में अलग करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. यदि इतिहास को उठा कर देखा जाए तो पता चलेगा कि बुन्देलखण्ड कोई नया नाम नहीं है. तमाम सारे नामों से इस भूभाग को जाना जाता रहा है. देश की आज़ादी के बाद बुन्देलखण्ड को दो भागों में बाँट कर उत्तर-प्रदेश और मध्य-प्रदेश के साथ मिला दिया गया. आज़ादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी यहाँ की जनता को अपने अधिकार नहीं मिल सके हैं. प्रत्येक क्षेत्र में यहाँ के लोगों से भेदभाव किया जाता रहा है. इस भेदभाव का ताज़ा उदहारण तो चौंकाने वाला है. बुन्देलखण्ड विश्विद्यालय, झाँसी की एक प्रवेश परीक्षा का परीक्षा केन्द्र समूचे विश्वविद्यालय की सीमा से बाहर बनाया गया था. क्या किसी भी विश्वविद्यालय में ऐसा होता है कि उसकी परीक्षा किसी अन्य स्थान पर हो?
सरकारी आयोगों में, बार काउंसलिंग में, उच्च सिक्षा आयोग में या इसी तरह के अन्य महत्वपूर्ण विभागों में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोगों का किसी तरह का प्रतिनिधित्व नहीं होता है, ये पक्षपात नहीं तो और क्या है?
ये तो एक उदहारण है, ऐसे एक नहीं सैकडों उदहारण हैं जो बताते हैं कि इस क्षेत्र के साथ लगातार अन्याय होता आ रहा है. इस क्षेत्र में बालू, हीरा, खनिज पदार्थ अधिसंख्यक रूप से पाया जाता है पर इस क्षेत्र को अपनी सम्पदा का लाभ नहीं मिल पता है. बुन्देलखण्ड द्वारा लगातार करोड़ों, अरबों रुपये राजस्व के रूप में सरकार को दिया जाता है पर बदले में क्या मिलता है, किसानों का भूखों मरना, नौजवानों का घर छोड़ कर महानगरों की ओर पलायन करना, सूखे से लोगों का आत्महत्या करना. सूखे की भयावह स्थिति से अनजान बनी सरकार को जब आन्दोलनों के सहारे जगाया गया तब कुछ लाख रुपये इस क्षेत्र के हिस्से में आए वो भी अफसरशाही के रुतबे में इधर-उधर हो गए. क्या फायदा होगा इस सहायता का ये नहीं सोचा गया बस बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सूखा-राहत के नाम पर खाना पूर्ति कर ली गई.
इस विभीषिका के बाद भी जब सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो कब ध्यान देगी पता नहीं? अब लगता है कि अलग राज्य की मांग शायद जायज है. कुछ नहीं तो कम से कम हमारी सम्पदा तो हमें ही मिलेगी, हमारे क्षेत्र के युवक अपने बुन्देलखण्ड में तो नौकरी पा सकेंगे, यहाँ का किसान अपनी फसल का अपना लाभ तो पा सकेगा.
मांग उठ रही है आज नहीं तो कल सरकारों को जागना होगा. देर से ही सही पर अलग राज्य बुन्देलखण्ड तो बनाना ही होगा.

Saturday, 29 June 2013

इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया

  • हमलोग बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से वास्ता रखते हैं और हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर एक दूसरे से मिले. सालों बुंदेलखंड के छात्रों से संबंद्धित कई मुद्दों पर वाद-विवाद करने के पश्चात हमारे दिल ने हमसे एक प्रश्न पूछा, कि “क्या हम वाकई कोई योगदान दे रहे हैं बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान में?”.

    इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया और इस चिंगारी से हमारे अंदर क्रांति विष्फुरित हुई. इतने सालों तक ब्यर्थ समय गँवाने के बाद हमें ये अहसास हुआ कि हम अगर वाकई कुछ भला चाहते हैं बुंदेलखंड का तो हमें खुद बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान का बीड़ा उठाना होगा. और इसकी लिए हमें काल्पनिक दुनिया से बहार निकल हर विद्यालय गली कूचे में समस्याओं के खिलाफ युद्ध का शंखनाद करना होगा. हमें विकास और क्रांति की ऐसी मशाल जलानी होगी जिसकी रोशनी से बुंदेलखंड का हर घर आँगन चकाचौंध हो जाय. विकास और उत्थान की एक ऐसी आग लगानी होगी जो हर बुन्देलखंडी को महाराज क्षत्रसाल ,आल्हा उदल; महारानी लक्ष्मीबाई ,ध्यानचंद ,चंद्रशेखर आजाद मैथली शरण गुप्त ,ब्रन्दावन लाल वर्मा ,हरिसिंह गौर बना दे.

    इसी उद्देश्य के साथ हम सभी छात्रों ने अपने आप को संगठित करने का काम शुरू किया और हम निरंतर इसके लिए प्रयासरत हैं. हमारा संकल्प कि हर किसी को हमारी बुन्देलखंडी अस्मिता का अहसास हो और वो भी इस क्रांति की राह पर चल पड़ें. और हम बनायें एक नया बुंदेलखंड ,बुंदेलखंड जिसकी ख्याति और समृद्धि चेदी महा जनपद और क्षत्रसाल के राज्य से भी ऊँची हो और शूरवीरों की भूमि महोबा से आगे हो , एक ऐसा बुंदेलखंड जहाँ चंदेलों से भी ज्यादा मजबूत लोकतान्त्रिक व्यबस्था मौजूद हो, बुंदेलखंड जहाँ के छात्र महाराज क्षत्रसाल से भी ज्यादा प्रेमशील, कर्तब्यपरायण और सहिंष्णु हों. एक ऐसा बुंदेलखंड जिसकी संस्कृति और भाषा बुन्देलखंडी से भी ज्यादा प्रेमपूर्ण हो.

    जय बुंदेलखंड !जय हिंद!

Monday, 17 June 2013

Support You Want to Bundelkhand State

The region has remained backward even after six decades of independence due to gross negligence by successive governments in the state", said president of the Bundelkhand Mukti Morcha, Mukund Kishore Goswami. Time has come for people of the region to demand their due right, he said during a meeting of the Morcha at the ancient temple town of Orchha in district Tikamgarh the other day. 
 
The participants in the meeting were unanimous that the only option to get rid of the curse of backwardness was formation of a separate state of Bundelkhand.
 
The movement for separate Bundelkhand state is nearly three decades old. It mostly continued in fits and starts in the absence of strong political will and mass support. 
 
The movement, according to another leader of the Morcha Harimohan Vishwakarma, should be mass- based rather than political because politicians often used it as a platform to boost their own career.
 
"We will shortly launch public contact drives to bring the locals under one umbrella to demand a separate state" he told DNA.
 
The separate state envisions 13 districts including seven from the Uttar Pradesh and six in the MP. 
 

The districts in UP include Jhansi, Jalaun, Lalitpur, Hamirpur, Mahoba, Banda, and Chitrakoot besides Datia, Tikamgarh, Chhatarpur, Panna, Damoh and Sagar in Madhya Pradesh.












Monday, 19 November 2012

Proposed Bundelkhand state

For the last 50 years there has a movement for separation of Bundelkhand state. Bundelkhand is geographically the central part of India covering some part of MP and some of UP. The population of this region is approximately 50 million. In spite of being rich in minerals, the people of Bundelkhand are very poor and the region is underdeveloped and underrepresented in state and central politics. There are several local parties and organisations, some promoting further development of the region and some seeking separate statehood.

In November 2011 Uttar Pradesh CM proposed to split UP in four parts, with one part being Bundelkhand. The proposed state includes the following districts
From Uttar Pradesh
  • Jhansi
  • Jalaun
  • Lalitpur
  • Hamirpur
  • Mahoba
  • Banda
  • Chitrakoot
From Madhya Pradesh
  • Datia
  • Tikamgarh
  • Chhatarpur
  • Panna
  • Damoh
  • Sagar
In addition to the above districts, sometimes the following districts of Madhya Pradesh are sometimes considered as the part of Bundelkhand: Madhya Bharat/Gird region
  • Morena
  • Sheopur
  • Bhind
  • Gwalior
  • Shivpuri
  • Guna
  • Dhaulpur
:

We want Bundelkhand state : Bundelkhand Akikrit Party