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Saturday, 29 June 2013

इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया

  • हमलोग बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से वास्ता रखते हैं और हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर एक दूसरे से मिले. सालों बुंदेलखंड के छात्रों से संबंद्धित कई मुद्दों पर वाद-विवाद करने के पश्चात हमारे दिल ने हमसे एक प्रश्न पूछा, कि “क्या हम वाकई कोई योगदान दे रहे हैं बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान में?”.

    इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया और इस चिंगारी से हमारे अंदर क्रांति विष्फुरित हुई. इतने सालों तक ब्यर्थ समय गँवाने के बाद हमें ये अहसास हुआ कि हम अगर वाकई कुछ भला चाहते हैं बुंदेलखंड का तो हमें खुद बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान का बीड़ा उठाना होगा. और इसकी लिए हमें काल्पनिक दुनिया से बहार निकल हर विद्यालय गली कूचे में समस्याओं के खिलाफ युद्ध का शंखनाद करना होगा. हमें विकास और क्रांति की ऐसी मशाल जलानी होगी जिसकी रोशनी से बुंदेलखंड का हर घर आँगन चकाचौंध हो जाय. विकास और उत्थान की एक ऐसी आग लगानी होगी जो हर बुन्देलखंडी को महाराज क्षत्रसाल ,आल्हा उदल; महारानी लक्ष्मीबाई ,ध्यानचंद ,चंद्रशेखर आजाद मैथली शरण गुप्त ,ब्रन्दावन लाल वर्मा ,हरिसिंह गौर बना दे.

    इसी उद्देश्य के साथ हम सभी छात्रों ने अपने आप को संगठित करने का काम शुरू किया और हम निरंतर इसके लिए प्रयासरत हैं. हमारा संकल्प कि हर किसी को हमारी बुन्देलखंडी अस्मिता का अहसास हो और वो भी इस क्रांति की राह पर चल पड़ें. और हम बनायें एक नया बुंदेलखंड ,बुंदेलखंड जिसकी ख्याति और समृद्धि चेदी महा जनपद और क्षत्रसाल के राज्य से भी ऊँची हो और शूरवीरों की भूमि महोबा से आगे हो , एक ऐसा बुंदेलखंड जहाँ चंदेलों से भी ज्यादा मजबूत लोकतान्त्रिक व्यबस्था मौजूद हो, बुंदेलखंड जहाँ के छात्र महाराज क्षत्रसाल से भी ज्यादा प्रेमशील, कर्तब्यपरायण और सहिंष्णु हों. एक ऐसा बुंदेलखंड जिसकी संस्कृति और भाषा बुन्देलखंडी से भी ज्यादा प्रेमपूर्ण हो.

    जय बुंदेलखंड !जय हिंद!

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