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Friday, 25 October 2013

झांसी रैली LIVE: 'जालिम लोशन की तरह गरीबी की मार्केटिंग कर रहे हैं राहुल'

झांसी. यूपी के झांसी के जीआईसी ग्राउंड में भाजपा की विजय शंखनाद रैली हो रही है। इसमें भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, उमा भारती, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, कल्याण सिंह, विनय कटियार और कलराज मिश्र पहुंचे हैं। बॉलीवुड एक्टर और राजनेता राजा बुंदेला बीजेपी में शामिल हो गए हैं। वह भी मंच पर उपस्थित हैं।
 
बुंदेलखंड की धरती पर नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए उमा भारती ने कहा, 'झांसी में इतना बड़ा जनसमूह कभी नहीं देखा है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना अपने आप में इतिहास है। मोदी ने गुजरात में सुशासन दिया है। वहां पर महिलाएं सुरक्षित है, मुसलमान महफूज हैं। उनको रोजी और रोटी मिली हुई है। उनकी इसी उपलब्धि को देखते हुए पार्टी ने पीएम पद का उम्मीदवार बनाया है।'
 
राजनाथ सिंह ने कहा, 'मैं झांसी की धरती पर पहली बार ऐसा जनसैलाब देखा है। बुंदेलखंड के लोगों के लिए गरीबी बड़ा अभिशाप है। किसान आए दिन अकाल और सूखे से जूझ रहा है। नरेंद्र भाई ने गुजरात में जो किया है, उसकी प्रशंसा हर तरफ हो रही है। अमेरीका भी इसका गुणगान कर रहा है। मैं वहां गया था वहां पर अप्रवासीय भारतीयों का कहना था कि मोदी को भारता का पीएम बनना चाहिए। राहुल गांधी जालिम लोशन की तरह गरीबी की मार्केटिंग कर रहे हैं। कांग्रेस ने देश में गरीबी पैदा की है। राहुल गरीबों के घर जाकर मजाक उड़ाते हैं। वहां चारपाई पर लेटकर फोटो खिंचवाते हैं।'
 
अपने भाषण में राजनाथ से एक गलती भी हो गई। उन्होंने उमा भारती को मध्य प्रदेश की पूर्व उप मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया। सपा और बसपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में ये दोनों कांग्रेस के पीठ खुजलाते हैं और दिल्ली में जाकर उनका पीठ सहलाते हैं।
 
बताते चलें कि पूरा झांसी शहर में भाजपा और नरेंद्र मोदी के होर्डिंग-बैनर पटा पड़ा है। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रभारी अमित शाह खुद रैली स्थल पर जमे रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेयी का मानना है कि यह रैली बुंदेलखण्ड की ऐतिहासिक रैली साबित होगी। कानपुर के बाद बुंदेलखंड की धरती पर भी नरेन्द्र मोदी की यह पहली रैली है। मोदी को लेकर बुंदेलखंड में भी लोगों के अंदर जबरदस्त उत्साह है।
 
लोकप्रियता भुनाने के लिए लगाया मोदी टी स्टाल
 
नरेन्द्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को दुकानदार भी भुनाने में पीछे नहीं है। रैली स्थल से आधा किलोमीटर दूर आज रमेश ने मोदी टी स्टाल खोल दी है। मोदी के नाम की टी स्टाल देख लोगों की भीड़ भी वहां अच्छी खासी लगी हुई है। सुबह ही अमित शाह भी स्टेज की फाइनल तैयारी के साथ रैली स्थल का दौरा कर चुके हैं। अब लोगों को इंतजार है तो बस नरेन्द्र मोदी का।

Narendra Modi to woo Bundelkhand with mega Jhansi rally

Jhansi: Days after addressing a huge rally in Uttar Pradesh's Kanpur district, the BJP's prime ministerial candidate Narendra Modi is all set to arrive in the Bundelkhand region to reach out to the people here on Friday. 

According to a report, the main opposition party, BJP, is expecting around two lakh people to attend Modi's Jhansi rally. 

In an order to bring more crowd in Jhansi, the party is reportedly ferrying people from neighbouring Uttar Pradesh and the poll-bound Madhya Pradesh, where assembly elections will held on November 25. 

Vijendra Singh Sisodia, the BJP spokesperson from Madhya Pradesh, said that Modi's message in Jhansi will have a bearing on assembly elections in MP. 

Babu Ram Nishad, BJP's Bundelkhand region president said, "There are no major industries or educational institutions in Bundelkhand, which can cater crowd to Jhansi rally. Majority of the population here are farmers." 

The low population density in Jhansi is said to be the main reason behind BJP's move to ferry audience from neighbouring MP and UP. 

The BJP has only three MLAs from Bundelkhand region- Uma Bharti from Charkhari, Ravi Sharma from Jhansi and Sahdvi Niranjan Jyoti from Hamirpur. 

The party has worked overtime to accord a warm and stupendous welcome to Modi, who is scheduled to address a rally at Government Inter College ground here.

उस झोपड़ी तक जायेंगे मोदी, जहां राहुल ने बितायी थी रात





लखनऊ/झांसी। भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उस जगह पर जाने वाले हैं, जहां पर एक गरीब किसान की झोपड़ी में जाकर राहुल गांधी ने रात बितायी थी और उसके घर का खाना खाया था। जी हां मोदी की अगली रैली बुंदेलखंड में है। 25 अक्टूबर को झांसी में होने वाली रैली को लेकर दो दिन पहले ही पार्टी के नेताओं ने यहां डेरा डाल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सभी संगठन मंत्रियों ने रैली को सफल बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। रैली में आने वाली भीड़ और रैली स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बुंदेलखंड के सभी सात जिलों में दौरा करने का मन बनाया। इसके लिए वह मंगलवार देर शाम झांसी पहुंच गए। रैली में भीड़ कम न रह जाए, इसके लिए वाजपेयी बुधवार से बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों का दौरा करेंगे। इसका उद्देश्य रैली में आने वाले लोगों और उनके लिए वाहनों की व्यवस्था करना है। वाजपेयी के अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष हरिद्वार दूबे, महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह व पंकज सिंह शामिल हैं। पार्टी के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी भी 24 को झांसी पहुंच रहे हैं। कानपुर में मोदी की सफल रैली के बाद से ही भाजपाइयों में उत्साह का संचार हुआ है और नेताओं का दावा है कि झांसी की रैली भी ऐतिहासिक होगी। प्रदेश के मीडिया प्रभारी मनीष शुक्ला ने बताया कि झांसी में राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में मोदी की रैली की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। प्रदेश के लगभग सभी नेता वहां पहुंच चुके हैं। रैली में भाजपा की ओर से 19 कैमरों की व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से चैनलों को वीडियो एवं आडियो क्लिपिंग मुहैया कराई जाएगी।

झांसी में मोदी की रैली का काउंट डाउन शुरू Read...


झांसी| उत्तर प्रदेश में बुंदेलों की नगरी और अपनी ऐतिहासिकता के लिए विश्व भर में विख्यात झांसी शहर में नरेंद्र मोदी का आगमन 25 अक्टूबर को होने जा रहा है। झांसी में एक प्रमुख चैराहे पर बड़ी सी होडिर्ंग लगवाई गई है और इसमें एक बड़ी सी घड़ी दर्शायी गई, जो इस बात की तसदीक कर रही है कि मोदी के आने का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। होर्डिंग पर मोदी की ओर से अपील की गई है कि..मैं आ रहा हूं..आप भी आएंगे न। भाजपाइयों ने लोगों को रैली स्थल पर लाने के लिए यह अनूठा तरीका अपनाया है, जो झांसी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भाजपाइयों की मानें तो खास अंदाज में यह अपील लोगों को आकर्षित करने के लिए ही की गई हैं। कानपुर रैली की सफलता के बाद भाजपाइयों का उत्साह सातवें आसमान पर है। मोदी के आगमन को लेकर भाजपाइयों की तरफ से की गई यह अपील खासतौर से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो चुकी है। इससे पूर्व कानपुर की रैली में भी मोदी की ओर से जनता से खास अंदाज में अपील की गई थी। मोदी ने कानपुर से विजय शंखनाद रैली का आगाज पहले सुनो, फिर चुनो नारे के साथ किया था। होर्डिग्‍स के बारे में भाजपा के प्रदेश इकाई के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा, "नरेंद्र मोदी के प्रति यह भाजपा कार्यकर्ताओं का असीम प्यार है। यह दर्शाता है कि भाजपा और लोगों में मोदी की लोकप्रियता कितनी तेजी से बढ़ रही है।" इस बीच बुंदेलखंड के झांसी शहर में हो रही मोदी की रैली के अपने मायने भी हैं। भाजपा के लिहाज से यह क्षेत्र काफी मायने रखता है। बुंदेलखंड के सात जिले बांदा, हमीरपुर, झांसी, जालौन, ललितपुर, चित्रकूट और महोबा हैं। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े इस जिले में मोदी के झांसी आगमन की आहट के बाद से ही उथल-पुथल मची हुई है।

Bundelkhand New: Narendra Modi to address rally in Bundelkhand


LUCKNOW: BJP's prime ministerial candidate for the 2014 Lok Sabha elections, Narendra Modi will address a Vijay Shankhnaad rally Friday in Jhansi of the Bundelkhand region, which has been long considered a bastion of the SP and BSP.

The rally, 313 km from here, is the second in Uttar Pradesh out of the proposed nine rallies by year end. It is aimed at not only influencing voters in the four parliamentary constituencies of the Bundelkhand region, but also in districts like Guna, Datia, Panna, Shivpuri, Teekamgarh and Chatarpur in Madhya Pradesh that go to polls next month.

Bharatiya Janata Party (BJP) leaders say Modi will be "seeking account" of the Rs.7,200 crore package given to Bundelkhand region by the central government at the behest of Congress vice-president Rahul Gandhi.

Rahul's political innings in the state began six years back from a Dalit home here, but nothing has happened here, Vijay Bahadur Pathak, BJP spokesman told IANS.

"Despite the Congress hype of political focus and financial assistance to this area, it sadly contributes for the maximum farmer suicides in the state. Both the Congress and Samajwadi Party (SP) try to fool the poor people of this region by mere lip service" he added.

Out of the four Lok Sabha seats in the region - Jalaun, Hamirpur, Banda and Jhansi, the BJP holds no seat, while the Samajwadi Party (SP) and the Bahujan Samaj Party (BSP) have two seats each.

"It is our endeavour not only to take these seats from opposition parties, but also to change the face of the undeveloped Bundelkhand region," state BJP president Laxmikant Bajpayi told IANS.

The rally at the GIC grounds in Jhansi will also see party leader Uma Bharti and former UP chief minister Kalyan Singh, who earlier this year merged his regional party with the BJP.

Tuesday, 15 October 2013

बुंदेलखण्ड के सैकड़ों ग्रामीणों ने किया मतदान का बहिष्कार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के चुनाव में बुंदेलखण्ड के सैकड़ों ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र में विकास न होने के कारण गुरुवार को होने वाले मतदान का बहिष्कार कर जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना आक्रोश प्रकट किया।

सड़क, बिजली और पानी की बदहाली से गुस्साए हमीरपुर जिले के बेरी और इंद्रपुरी गांव के सैकड़ों लोगों ने गुरुवार को मतदान का बहिष्कार कर लोकतंत्र के उत्सव में शामिल होने से इंकार कर दिया।

हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले इन दोनों गावों में करीब 3,000 ग्रामीण मतदाता हैं। सदर विधानसभा क्षेत्र से 2007 का विधानसभा चुनाव अशोक सिंह चंदेल समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर जीते थे।
ग्रामीण गोपाल लोधी ने संवाददाताओं से कहा कि हम लोगों के गांव में सड़क नहीं है। बिना सड़क के आवागमन में बहुत दिक्कतें आती हैं। सड़क बनवाने की मांग को लेकर हमने अपने स्थानीय विधायकों से कई बार गुहार लगाई लेकिन सबने हमें केवल आश्वासन ही दिया। इसलिए हमने किसी नेता को अपना वोट न देने का फैसला किया।

उधर हमीरपुर के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीनिवास ने आईएएनएस से कहा, "जैसे ही मुझ्झे बहिष्कार की जानकारी मिली मैंने अधिकारियों को गांव भेजकर मामले की जानकारी की तो पता चला कि दोनों गांव के लोगों ने विकास कार्यो से नाराज होने के कारण मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया।"

जिलाधिकारी ने कहा कि अधिकारियों द्वारा काफी समय तक मतदान करने के लिए ग्रामीणों की मान-मनौव्वल की गई लेकिन वे बहिष्कार के अपने फैसले पर अटल रहे। एटा जिले के गुमनापुर और फिरोजाबाद जिले के तुंडना गांव में भी ग्रामीणों द्वारा सड़क और बिजली की समस्या को लेकर मतदान का बहिष्कार किए जाने की खबरें हैं।

बुंदेलखंड में दैवीय आपदा, हजारों किसान प्रभावित

कई साल से दैवीय आपदाओं की वजह से बदहाली का दंश झेल रहे बुंदेलखंड के किसान एक बार फिर दैवीय आपदा के शिकार हो गए हैं। पिछले हफ्ते भारी ठंड़ के बीच पड़े ‘पाला' से हजारों एकड़ दलहन और तिलहन की फसल सूख गई है। पांच अरब से ज्यादा का सरकारी कर्ज के कर्जदार बुंदेली किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे झलक रही हैं, उन्हें सरकारी मदद की भी ज्यादा उम्मीद नहीं है। पिछले कई साल से बुंदेली किसान दैवीय आपदा की मार झेल रहा है, तमाम संसाधनों की कमी के चलते भी इस साल खेतों में दलहन और तिलहन की कुछ बढि़या फसल लहलहा रही थी। किसानों को उम्मीद थी कि अबकी बार वह जहां अपने ऊपर चढ़े सरकारी कर्ज की अदायगी कर सकेगा, वहीं घरेलू खर्च की कमी पूरी करने में भी सफल होगा। लेकिन, पिछले हफ्ते भारी ठंड़ व कोहरे के दौरान जबर्दस्त पड़े ‘पाला' से किसानों की किस्मत में छेद हो गया है। खेतों में लहलहा रही अरहर, चना, मसूर, सरसो और अलसी की फसल पाला की चपेट में आकर सूख गई है। इस दैवीय कहर के शिकार बुंदेलखंड के सभी सातों जनपद बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, झांसी व ललितपुर हुए हैं। 

बांदा जनपद में सबसे ज्यादा नुकसान फतेहगंज के जंगली इलाके के बघोलन, मवासी डेरा, बिलरिया मठ, गोबरी गोड़रामपुर, रक्सा जैसे दो दर्जन ऊबड़-खाबड़ गांवों में हुआ है, यहां खेतों में लहलहाती दलहन-तिलहन की फसल पूरी सूख गई है। गांबरी गोड़रामपुर के किसान गुलाब ने बताया कि ‘इलाके में करीब चार हजार एकड़ की फसल नष्ट हो गई है।' डढ़वामानपुर की ग्राम प्रधान शान्ति यादव का कहना है कि ‘किसानों की पूरी फसल खेतों में खड़ी थी, अबकी बार की फसल देख कर लगता था कि किसान सरकारी कर्ज की अदायगी के अलावा अपनी गृहस्थी का बोझ उठा लेगा। मगर पाला के प्रकोप से सूखी फसल की वजह से हर किसान दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा।' बांदा के प्रगतिशील किसानों में गिने जा रहे बड़ोखर गांव के प्रेम सिंह का कहना है कि ‘समूचे जनपद में पाला की चपेट में आकर करीब 20 करोड़ रुपए की फसल नष्ट हो गई है।' चित्रकूटधाम मंडल बांदा में तैनात कृषि उपनिदेशक आर.के. तिवारी की मानें तो बांदा जिले में 19 हजार हेक्टेअर की फसल सूख चुकी है।' जिलाधिकारी जीएस नवीन कुमार का कहना है कि ‘समस्त उपजिला अधिकारियों से उनके इलाके में हुए नुकसान का ब्यौरा मांगा गया है, फसल के मुआवजा के लिए शासन को लिखा जाएगा।' ललितपुर जनपद के किसान राजेश सहरिया ने बताया कि ‘जखौरा ब्लॉक के भरतपुरा, देवगढ़, मंड़वारी, राजगढ़ इलाके के किसान पूरी तौर पर बर्बाद हो चुके हैं, पूरी फसल खेतों में सूख गई है।' भरतपुरा के ग्राम प्रधान सोबरन सिंह यादव का कहना है कि ‘पाला पड़ने से बड़े काश्तकारों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।' वह बताते हैं कि ‘अरहर, मसूर, चना, सरसो व अलसी की फसल में कोई किसान बीज तक वापस नहीं ला पाएगा।' यहां के जिलाधिकारी ने बताया कि ‘नुकसान का आंकलन करने के लिए राजस्व अधिकारियों की टीम लगाई गई है, रिपोर्ट मिलते ही शासन को मदद के लिए लिखा जाएगा।' चित्रकूट जिले की मऊ-मानिकपुर क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक चन्द्रभान सिंह पटेल ने बताया कि ‘इस जिले में 60-70 फीसदी फसल पाला की वजह से सूख चुकी है।' सत्ता रूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के बांदा-चित्रकूट सांसद आर.के. सिंह पटेल का कहना है कि ‘उन्होंने जिलाधिकारी से सूखी फसल का आंकलन कराने का अनुरोध किया है।' बकौल सांसद, ‘मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर किसानों को मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।' कमावेश यही आलम महोबा, हमीरपुर और झांसी जिले का है, यहां भी भारी पैमाने पर दलहन और तिलहन की फसल पाले की चपेट में आकर सूख गई है। सामाजिक कार्यों के लिए महात्मा गांधी अवार्ड से सम्मानित गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘कृषि एवं पर्यावरण विकास संस्थान' के निदेशक सुरेश रैकवार ने बताया कि ‘बुंदेलखंड के किसानों पर पांच अरब से ज्यादा सरकारी कर्जे का बोझ लदा है, ज्यादातर किसानों ने खाद-बीज के लिए किसान क्रेडिट काडऱ् (केसीसी) से यह कर्ज लिया है।' उन्होंने कहा कि ‘यदि राज्य सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा नहीं की तो हताश किसान ‘आत्महत्या' जैसे कदम उठा सकते हैं।' भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) चित्रकूटधाम बांदा परिक्षेत्र के महासचिव ध्रुव सिंह तोमर ने कहा कि ‘पिछले साल भी ओला और बेमौसम बारिस से किसानों की फसल नष्ट हो गई थी, लेकिन एक धेला सरकारी मदद नहीं मिली, इस साल भी सरकारी मदद की ज्यादा उम्मीद नहीं है।' उन्होंने मांग की कि ‘सरकारी कर्ज की वसूली में तत्काल रोंक लगा कर किसानों को न्यूनतम उत्पादन के आधार पर मुआवजा दिया जाए।'

बुंदेलखंड को अलग राज्‍य बनाना चाहती है B.S.P and B.J.P

लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2014 में केंद्र में आने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश से वापसी का रोडमैप तैयार कर लिया है। भाजपा ने बुंदेलखंड को अलग राज्‍य बनाने का अभियान शुरू कर दिया है। यहां प्रदेश भाजपा के दो दिवसीय कार्यसमिति के समापन समारोह में गुरूवार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एंव मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि केन्द्र में भाजपा को वापस लाना है तो पहले उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करना होगा। उमा भारती ने मुलायम सिंह यादव द्वारा भाजप के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी की प्रशंसा को मुलायम की राजनीतिक शालीनता बताया। उन्होंने कहा इसका मतलब यह नहीं लगाया नहीं जाना चाहिए कि भाजपा और समाजवादी पार्टी कभी एक दूसरे के नजदीक आ सकते हैं। यूपी में सपा को भाजपा ही समाप्त करेगी। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव के तीसरे मोर्चे का सपना कभी पूरा नहीं होगा। केन्द्र में भाजपा की वापसी की लिए जरूरी है कि उत्तर प्रदेश लोकसभा की कुल 80 सीटों में से आधी सीटें जीतनी होंगी। इसके लिए कार्यकर्ताओं को परिक्रमा नहीं पराक्रम की राजनीति करनी होगी। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव यदि वास्तव में डॉ. लोहिया को मानने वाले हैं तो केन्द्र की भ्रष्टतम मनमोहन सरकार से समर्थन वापस लें। 

क्योंकि डॉ. लोहिया भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करते थे। लेकिन मुलायम सिंह यादव जेल जाने के डर से समर्थन वापस नहीं ले रहे हैं। देश की सीमा पर बाहरी खतरों के साथ भीतर नक्सलवाद जैसी आंतरिक समस्याओं ने पैर फैलाए हैं। आतंकवाद के साथ नक्सलवाद को भी समाप्त करना जरूरी है। संजय दत्त का नाम लिए बगैर उमा ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक के लिए अपराधियों की सजा माफ करने की वकालत कर रहे हैं यह देश के लिए घातक है। इस तरह के वोट बैंक की राजनीति करने वालों के स्वार्थ तो पूरे हो जाते हैं लेकिन देश का बड़ा नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री रहते हुए अरूण शौरी ने एक अध्ययन के आधार पर मुझे बताया था कि शोषित व गरीब क्षेत्रों में माओवाद पनपने की आशंका रहती है। उत्तराखण्ड, बुंदेलखण्ड और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र पिछड़ा, शोषित व गरीब है। इसलिए बुंदेलखण्ड में माओवाद पनपे की आशंका है। उत्तराखण्ड अलग राज्य गठित होने से वहां माओवाद नहीं पनप पाया। भाजपा ने बुंदेलखण्ड में अलग सांगठनिक इकाई गठित कर दिया है। अब भाजपा सत्ता में आई तो बुंदेलखण्ड को अलग राज्य बनाएंगे। उन्होंने कहा कि बुंदेलखण्ड पैकेज में बंदरबांट हुई है। पिछड़े बुंदेलखण्ड के विकास के लिए आए पैसे को हजम करने वालों के हलक में हाथ डाल कर निकालना होगा। जम्मू में सेना के जवान की आंख निकालने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि सेना शौर्य के लिए जानी जाती है ओछी हरकतों के लिए नहीं। उन्होंने भारत को सैन्य व अर्थ महाशक्ति बनाने के लिए काम करने का भी आह्वान किया। बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव विधानसभा पूर्व अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी ने पेश किया। जबकि समर्थन पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह ने किया। बुंदेलखण्ड पर प्रदेश महामंत्री रामनाथ कोबिंद ने प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने किया। दोनों प्रस्ताव बिना संशोधन के पारित हो गए। कार्यक्रम के समापन के बाद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि लोकसभा प्रत्याशियों की सूची मई के अंत तक केन्द्रीय नेतृत्व को भेज दी जाएगी। कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि आज के बाद जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष के दौरान जेल जाने वाले कार्यकर्ताओं के घर का खर्च तथा घायलों के इलजा का खर्च पार्टी उठाएगी। उन्होंने बुंदेलखण्ड के पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस सपा और बसपा को जिम्मेदार हैं


बुन्देलखंड में बदलाव की मुहिम लाने में जुटी 'जमुनिया'

बैंगलोर। दरअसल ये जमुनिया कोई महिला न होकर एक नाट्य कृति है, जिसका मंचन इन दिनों ललितपुर में चल रहा है। केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के प्रोडक्शन मैनेजर नरेन्द्र पांडेय ने बताया कि जमुनिया एक विधवा महिला के संघर्ष की ऐसी कहानी है, जिसने अपने बलबूते पर अशिक्षा और अज्ञान के अंधेरे में डूबे लोगों को जीने का मकसद दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से लेकर उन्हें महिला सशक्तीकरण का सही अर्थ समझाया और खुद अनपढ़ महिला से साक्षर बन ग्राम प्रधान बनने तक का सफर तय किया। खास बात है कि इस नाट्य कृति की प्रस्तुति में बुंदेली कलाकारों के शामिल होने से आम आदमी बेहतर तरीके से नाटक का मकसद समझ पा रहा हैं। इस नाटक का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के सुदूर इलाकों में अशिक्षा एवं अज्ञानता में डूबे लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना एवं विकास की मुख्य धारा में लाते हुए सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के प्रति जागरूक करना हैं।  

महिला सशक्तिकरण पर आधारित नाटक का कथानक एक गांव है जिसमें रहने वाली एक विधवा महिला 'जमुनिया' की संपत्ति उसका देवर हड़प लेता है और समाज की आंखों में धूल झोंकने के लिए देवर उसका एक बच्चा छीनकर उसे धक्के मारकर घर से निकाल देता है। बेटी को अपने साथ लेकर जमुनिया दूसरे गांव पहुंचती है और एक बूढ़े चैकीदार के यहां झोपड़ी में रुक जाती है। वृद्ध चौकीदार उसे अपनी बेटी मानकर अपने घर रख लेता है। वहां जमुनिया बांस की टोकरी बनाना सीख कर अपनी बच्ची का भरण पोषण करने लगती है। इसी बीच शारदा नामक महिला से उसकी दोस्ती हो जाती है। गांव में दाई नहीं होने से गर्भवती शारदा की दर्दनाक मौत हो जाती है। इस हादसे से जमुनिया विचलित हो उठती है और गांव में स्वास्थ केंद्र बनवाने की ठान लेती है। जमुनिया चैकीदार काका से इस उम्र मे पढ़ने की इच्छा जताती है और काका उसको प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में प्रवेश दिला देते हैं। शिक्षा का उपयोग करके जमुनिया परेशान ग्रामीणों की मदद करती है, जिससे गांव में उसकी ख्याति फैलने लगती है। इस बीच पंचायत चुनाव आते हंै और जमुनिया दशकों से जीतने वाले ग्राम प्रधान को पराजित कर गांव की प्रधान बन जाती हैं। जमुनिया आगे का सफर तय करती हुई जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत पूर्व में हुए घपलों को उजागर करती है और गांव के विकास में जुट जाती है। वह जिलाधिकारी व अन्य अफसरों से मिलकर स्कूल, अस्पताल व सड़क बनवाती है। इसके बाद जमुनिया अपनी ससुराल पहुंचती हैं और कानूनी मदद से बच्चा और पति की संपत्ति हासिल करती हैं। बुन्देलखंड का अपने आप में गौरवशाली इतिहास है। यहां की महारानी लक्ष्मीबाई और अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं की आज भी देश मिसाल देता है। बदले वक्त में बुन्देली महिलाओं में एक बार फिर ये जज्बा लौटाने, उन्हें अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए जमुनिया के जरिए की जा रही पहल सराहनीय है।



Friday, 9 August 2013

बुंदेलखण्ड को बनाएंगे विकास का ‘माडल’: बेनी

केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस की अगली सरकार बनते ही अति पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखण्ड को विकास का ‘माडल’ बनाकर देश के सामने रख दिया जाएगा वर्मा ने झांसी में इस्पात प्रसंस्करण इकाई के उद्घाटन समारोह में कहा कि केन्द्र में कांग्रेस की अगली सरकार बनी तो बुंदेलखण्ड का विकास किया जाएगा और उसे तरक्की का माडल बनाकर देश के सामने रखा जाएगा.

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बुंदेलखण्ड को अलग राज्य बनाये जाने की मांग का वह अपने नेतृत्व के सम्मुख समर्थन भी करेंगे.

वर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र में जनता की मांग पर स्टील यार्ड तथा सर्विस सेंटर भी खोला जाएगा, जहां क्षेत्रीय लोगों को नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर नौकरियां दी जाएंगी.

उन्होंने राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार पर प्रदेश को लूटने का आरोप लगाया और कहा कि समूचा राज्य अपराधियों की गिरफ्त में है.

केन्द्रीय राज्यमंत्री तथा क्षेत्रीय सांसद प्रदीप जैन आदित्य ने इस मौके पर वर्मा से कहा कि वह द्वितीय राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की चर्चा कांग्रेस नेतृत्व से करने में सहयोग दें.
 

Sunday, 21 July 2013

बुंदेलखंड पैकेज का 15 तक होगा सत्यापन

मंडल के चारों जिलों में बुंदेलखंड पैकेज के कार्यों के सत्यापन के लिए मंडलायुक्त ने चार टीमें गठित कर अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है। सत्यापन रिपोर्ट 15 अगस्त तक प्रस्तुत करने को कहा गया है।
बुंदेलखंड पैकेज से वर्ष 2011-12 व 2012-13 में चारों जिलों में कराए गए कार्यों का शत-प्रतिशत सत्यापन होगा। मंडलायुक्त अशोक दीक्षित द्वारा नामित अधिकारियों में संयुक्त विकास आयुक्त, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (बांदा) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (बांदा) को ग्राम विकास, पशुपालन विभाग व दुग्ध विकास विभाग के कार्यो का सत्यापन करने को कहा गया है। दूसरी टीम मेें एआईजी स्टांप (बांदा), अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (महोबा) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (महोबा) को सिंचाई विभाग व लघु सिंचाई विभाग के कार्यों के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तीसरी टीम में अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (चित्रकूट) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (चित्रकूट) को कृषि विभाग, कृषि विपणन (मंडी परिषद) और उद्यान विभाग की जांच सौंपी गई। चौथी टीम में अपर आयुक्त (द्वितीय), अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (हमीरपुर) व तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (हमीरपुर) को वन विभाग, भूमि विकास एवं जल संसाधन और ग्रामीण पेयजल संबंधी कार्यों की जांच करेंगे।

Monday, 1 July 2013

बुन्देलखण्ड राज्य बन कर रहेगा: bundelkhand state demand The dormant agitation for a separate Bundelkhand State


बुन्देलखण्ड को राज्य के रूप में अलग करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. यदि इतिहास को उठा कर देखा जाए तो पता चलेगा कि बुन्देलखण्ड कोई नया नाम नहीं है. तमाम सारे नामों से इस भूभाग को जाना जाता रहा है. देश की आज़ादी के बाद बुन्देलखण्ड को दो भागों में बाँट कर उत्तर-प्रदेश और मध्य-प्रदेश के साथ मिला दिया गया. आज़ादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी यहाँ की जनता को अपने अधिकार नहीं मिल सके हैं. प्रत्येक क्षेत्र में यहाँ के लोगों से भेदभाव किया जाता रहा है. इस भेदभाव का ताज़ा उदहारण तो चौंकाने वाला है. बुन्देलखण्ड विश्विद्यालय, झाँसी की एक प्रवेश परीक्षा का परीक्षा केन्द्र समूचे विश्वविद्यालय की सीमा से बाहर बनाया गया था. क्या किसी भी विश्वविद्यालय में ऐसा होता है कि उसकी परीक्षा किसी अन्य स्थान पर हो?
सरकारी आयोगों में, बार काउंसलिंग में, उच्च सिक्षा आयोग में या इसी तरह के अन्य महत्वपूर्ण विभागों में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लोगों का किसी तरह का प्रतिनिधित्व नहीं होता है, ये पक्षपात नहीं तो और क्या है?
ये तो एक उदहारण है, ऐसे एक नहीं सैकडों उदहारण हैं जो बताते हैं कि इस क्षेत्र के साथ लगातार अन्याय होता आ रहा है. इस क्षेत्र में बालू, हीरा, खनिज पदार्थ अधिसंख्यक रूप से पाया जाता है पर इस क्षेत्र को अपनी सम्पदा का लाभ नहीं मिल पता है. बुन्देलखण्ड द्वारा लगातार करोड़ों, अरबों रुपये राजस्व के रूप में सरकार को दिया जाता है पर बदले में क्या मिलता है, किसानों का भूखों मरना, नौजवानों का घर छोड़ कर महानगरों की ओर पलायन करना, सूखे से लोगों का आत्महत्या करना. सूखे की भयावह स्थिति से अनजान बनी सरकार को जब आन्दोलनों के सहारे जगाया गया तब कुछ लाख रुपये इस क्षेत्र के हिस्से में आए वो भी अफसरशाही के रुतबे में इधर-उधर हो गए. क्या फायदा होगा इस सहायता का ये नहीं सोचा गया बस बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सूखा-राहत के नाम पर खाना पूर्ति कर ली गई.
इस विभीषिका के बाद भी जब सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो कब ध्यान देगी पता नहीं? अब लगता है कि अलग राज्य की मांग शायद जायज है. कुछ नहीं तो कम से कम हमारी सम्पदा तो हमें ही मिलेगी, हमारे क्षेत्र के युवक अपने बुन्देलखण्ड में तो नौकरी पा सकेंगे, यहाँ का किसान अपनी फसल का अपना लाभ तो पा सकेगा.
मांग उठ रही है आज नहीं तो कल सरकारों को जागना होगा. देर से ही सही पर अलग राज्य बुन्देलखण्ड तो बनाना ही होगा.

Saturday, 29 June 2013

इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया

  • हमलोग बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से वास्ता रखते हैं और हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर एक दूसरे से मिले. सालों बुंदेलखंड के छात्रों से संबंद्धित कई मुद्दों पर वाद-विवाद करने के पश्चात हमारे दिल ने हमसे एक प्रश्न पूछा, कि “क्या हम वाकई कोई योगदान दे रहे हैं बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान में?”.

    इस सवाल ने हमारे अस्तित्व को झंकझोर के रख दिया और इस चिंगारी से हमारे अंदर क्रांति विष्फुरित हुई. इतने सालों तक ब्यर्थ समय गँवाने के बाद हमें ये अहसास हुआ कि हम अगर वाकई कुछ भला चाहते हैं बुंदेलखंड का तो हमें खुद बुंदेलखंड के छात्रों उत्थान का बीड़ा उठाना होगा. और इसकी लिए हमें काल्पनिक दुनिया से बहार निकल हर विद्यालय गली कूचे में समस्याओं के खिलाफ युद्ध का शंखनाद करना होगा. हमें विकास और क्रांति की ऐसी मशाल जलानी होगी जिसकी रोशनी से बुंदेलखंड का हर घर आँगन चकाचौंध हो जाय. विकास और उत्थान की एक ऐसी आग लगानी होगी जो हर बुन्देलखंडी को महाराज क्षत्रसाल ,आल्हा उदल; महारानी लक्ष्मीबाई ,ध्यानचंद ,चंद्रशेखर आजाद मैथली शरण गुप्त ,ब्रन्दावन लाल वर्मा ,हरिसिंह गौर बना दे.

    इसी उद्देश्य के साथ हम सभी छात्रों ने अपने आप को संगठित करने का काम शुरू किया और हम निरंतर इसके लिए प्रयासरत हैं. हमारा संकल्प कि हर किसी को हमारी बुन्देलखंडी अस्मिता का अहसास हो और वो भी इस क्रांति की राह पर चल पड़ें. और हम बनायें एक नया बुंदेलखंड ,बुंदेलखंड जिसकी ख्याति और समृद्धि चेदी महा जनपद और क्षत्रसाल के राज्य से भी ऊँची हो और शूरवीरों की भूमि महोबा से आगे हो , एक ऐसा बुंदेलखंड जहाँ चंदेलों से भी ज्यादा मजबूत लोकतान्त्रिक व्यबस्था मौजूद हो, बुंदेलखंड जहाँ के छात्र महाराज क्षत्रसाल से भी ज्यादा प्रेमशील, कर्तब्यपरायण और सहिंष्णु हों. एक ऐसा बुंदेलखंड जिसकी संस्कृति और भाषा बुन्देलखंडी से भी ज्यादा प्रेमपूर्ण हो.

    जय बुंदेलखंड !जय हिंद!

Monday, 17 June 2013

Support You Want to Bundelkhand State

The region has remained backward even after six decades of independence due to gross negligence by successive governments in the state", said president of the Bundelkhand Mukti Morcha, Mukund Kishore Goswami. Time has come for people of the region to demand their due right, he said during a meeting of the Morcha at the ancient temple town of Orchha in district Tikamgarh the other day. 
 
The participants in the meeting were unanimous that the only option to get rid of the curse of backwardness was formation of a separate state of Bundelkhand.
 
The movement for separate Bundelkhand state is nearly three decades old. It mostly continued in fits and starts in the absence of strong political will and mass support. 
 
The movement, according to another leader of the Morcha Harimohan Vishwakarma, should be mass- based rather than political because politicians often used it as a platform to boost their own career.
 
"We will shortly launch public contact drives to bring the locals under one umbrella to demand a separate state" he told DNA.
 
The separate state envisions 13 districts including seven from the Uttar Pradesh and six in the MP. 
 

The districts in UP include Jhansi, Jalaun, Lalitpur, Hamirpur, Mahoba, Banda, and Chitrakoot besides Datia, Tikamgarh, Chhatarpur, Panna, Damoh and Sagar in Madhya Pradesh.