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Tuesday, 15 October 2013

बुंदेलखंड में दैवीय आपदा, हजारों किसान प्रभावित

कई साल से दैवीय आपदाओं की वजह से बदहाली का दंश झेल रहे बुंदेलखंड के किसान एक बार फिर दैवीय आपदा के शिकार हो गए हैं। पिछले हफ्ते भारी ठंड़ के बीच पड़े ‘पाला' से हजारों एकड़ दलहन और तिलहन की फसल सूख गई है। पांच अरब से ज्यादा का सरकारी कर्ज के कर्जदार बुंदेली किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे झलक रही हैं, उन्हें सरकारी मदद की भी ज्यादा उम्मीद नहीं है। पिछले कई साल से बुंदेली किसान दैवीय आपदा की मार झेल रहा है, तमाम संसाधनों की कमी के चलते भी इस साल खेतों में दलहन और तिलहन की कुछ बढि़या फसल लहलहा रही थी। किसानों को उम्मीद थी कि अबकी बार वह जहां अपने ऊपर चढ़े सरकारी कर्ज की अदायगी कर सकेगा, वहीं घरेलू खर्च की कमी पूरी करने में भी सफल होगा। लेकिन, पिछले हफ्ते भारी ठंड़ व कोहरे के दौरान जबर्दस्त पड़े ‘पाला' से किसानों की किस्मत में छेद हो गया है। खेतों में लहलहा रही अरहर, चना, मसूर, सरसो और अलसी की फसल पाला की चपेट में आकर सूख गई है। इस दैवीय कहर के शिकार बुंदेलखंड के सभी सातों जनपद बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, झांसी व ललितपुर हुए हैं। 

बांदा जनपद में सबसे ज्यादा नुकसान फतेहगंज के जंगली इलाके के बघोलन, मवासी डेरा, बिलरिया मठ, गोबरी गोड़रामपुर, रक्सा जैसे दो दर्जन ऊबड़-खाबड़ गांवों में हुआ है, यहां खेतों में लहलहाती दलहन-तिलहन की फसल पूरी सूख गई है। गांबरी गोड़रामपुर के किसान गुलाब ने बताया कि ‘इलाके में करीब चार हजार एकड़ की फसल नष्ट हो गई है।' डढ़वामानपुर की ग्राम प्रधान शान्ति यादव का कहना है कि ‘किसानों की पूरी फसल खेतों में खड़ी थी, अबकी बार की फसल देख कर लगता था कि किसान सरकारी कर्ज की अदायगी के अलावा अपनी गृहस्थी का बोझ उठा लेगा। मगर पाला के प्रकोप से सूखी फसल की वजह से हर किसान दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा।' बांदा के प्रगतिशील किसानों में गिने जा रहे बड़ोखर गांव के प्रेम सिंह का कहना है कि ‘समूचे जनपद में पाला की चपेट में आकर करीब 20 करोड़ रुपए की फसल नष्ट हो गई है।' चित्रकूटधाम मंडल बांदा में तैनात कृषि उपनिदेशक आर.के. तिवारी की मानें तो बांदा जिले में 19 हजार हेक्टेअर की फसल सूख चुकी है।' जिलाधिकारी जीएस नवीन कुमार का कहना है कि ‘समस्त उपजिला अधिकारियों से उनके इलाके में हुए नुकसान का ब्यौरा मांगा गया है, फसल के मुआवजा के लिए शासन को लिखा जाएगा।' ललितपुर जनपद के किसान राजेश सहरिया ने बताया कि ‘जखौरा ब्लॉक के भरतपुरा, देवगढ़, मंड़वारी, राजगढ़ इलाके के किसान पूरी तौर पर बर्बाद हो चुके हैं, पूरी फसल खेतों में सूख गई है।' भरतपुरा के ग्राम प्रधान सोबरन सिंह यादव का कहना है कि ‘पाला पड़ने से बड़े काश्तकारों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।' वह बताते हैं कि ‘अरहर, मसूर, चना, सरसो व अलसी की फसल में कोई किसान बीज तक वापस नहीं ला पाएगा।' यहां के जिलाधिकारी ने बताया कि ‘नुकसान का आंकलन करने के लिए राजस्व अधिकारियों की टीम लगाई गई है, रिपोर्ट मिलते ही शासन को मदद के लिए लिखा जाएगा।' चित्रकूट जिले की मऊ-मानिकपुर क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक चन्द्रभान सिंह पटेल ने बताया कि ‘इस जिले में 60-70 फीसदी फसल पाला की वजह से सूख चुकी है।' सत्ता रूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के बांदा-चित्रकूट सांसद आर.के. सिंह पटेल का कहना है कि ‘उन्होंने जिलाधिकारी से सूखी फसल का आंकलन कराने का अनुरोध किया है।' बकौल सांसद, ‘मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर किसानों को मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।' कमावेश यही आलम महोबा, हमीरपुर और झांसी जिले का है, यहां भी भारी पैमाने पर दलहन और तिलहन की फसल पाले की चपेट में आकर सूख गई है। सामाजिक कार्यों के लिए महात्मा गांधी अवार्ड से सम्मानित गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘कृषि एवं पर्यावरण विकास संस्थान' के निदेशक सुरेश रैकवार ने बताया कि ‘बुंदेलखंड के किसानों पर पांच अरब से ज्यादा सरकारी कर्जे का बोझ लदा है, ज्यादातर किसानों ने खाद-बीज के लिए किसान क्रेडिट काडऱ् (केसीसी) से यह कर्ज लिया है।' उन्होंने कहा कि ‘यदि राज्य सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा नहीं की तो हताश किसान ‘आत्महत्या' जैसे कदम उठा सकते हैं।' भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) चित्रकूटधाम बांदा परिक्षेत्र के महासचिव ध्रुव सिंह तोमर ने कहा कि ‘पिछले साल भी ओला और बेमौसम बारिस से किसानों की फसल नष्ट हो गई थी, लेकिन एक धेला सरकारी मदद नहीं मिली, इस साल भी सरकारी मदद की ज्यादा उम्मीद नहीं है।' उन्होंने मांग की कि ‘सरकारी कर्ज की वसूली में तत्काल रोंक लगा कर किसानों को न्यूनतम उत्पादन के आधार पर मुआवजा दिया जाए।'

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